पटना: पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मनमाने ढंग से चल रहे ट्रेनिंग कैंपों पर जिला प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए नकेल कस दी है। प्रशासन ने इन सभी कैंपों को तत्काल प्रभाव से दीघा घाट और कलेक्टोरेट घाट पर स्थानांतरित कर दिया है। यह फैसला मैदान की हरियाली को बचाने, घास की बर्बादी रोकने और बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार, पहले गांधी मैदान में ट्रेनिंग कैंप चलाने वाले संस्थानों की संख्या महज 14 थी, जो हाल के दिनों में बढ़कर 60 के करीब पहुंच गई थी। इससे मैदान में अत्यधिक भीड़भाड़ हो रही थी, जिससे आम जनता को काफी असुविधा हो रही थी। कई व्यक्तियों और संस्थाओं ने इस संबंध में लिखित शिकायतें भी दर्ज कराई थीं। जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इन कैंपों को गंगा किनारे स्थित दीघा घाट और कलेक्टोरेट घाट पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। इन घाटों पर पर्याप्त जगह उपलब्ध है और कोचिंग संस्थान यहां छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए शारीरिक प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गांधी मैदान में मॉर्निंग वॉक, इवनिंग वॉक, व्यक्तिगत दौड़ या टहलने जैसी गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यह मैदान आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल है, जिसके सौंदर्यीकरण और विकास के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। इस कदम से मैदान की हरियाली को संरक्षित रखने के साथ-साथ ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं को भी कम करने की उम्मीद है।
यह फैसला प्रतियोगी छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन वैकल्पिक स्थलों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से गांधी मैदान की मूल सुंदरता को बहाल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया गया है।